शॉर्ट फिल्म ‘चलो जीते हैं’ की राष्ट्रपति भवन में हुई स्पेशल स्क्रीनिंग, प्रधानमंत्री मोदी के बचपन से है प्रेरित

Jul 27, 2018     admin   0 Comment     News

फिल्म को 29 जुलाई को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाएगा।

नई दिल्ली। देश के अंदर इन दिनों बड़ी-बड़ी हस्तियों की जीवनी पर फिल्म बनाने का चलन शुरू हो गया है। अपने-अपने क्षेत्र में महारत हासिल कर चुकी हस्तियों की बयोपिक इन दिनों बॉलीवुड में खूब देखने को मिल रही हैं। इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन पर आधारित एक शॉर्ट फिल्म दर्शकों के बीच है। इस फिल्म का नाम है ‘चलो जीते हैं’, जिसकी स्पेशल स्क्रीनिंग राष्ट्रपति भवन और राज्यसभा में की गई। इस फिल्म को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी देखा। ये फिल्म 29 जुलाई को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज की जाएगी। फिल्म का ट्रेलर पहले ही जारी कर दिया गया था।

फिल्म की स्क्रनिंग के दौरान मौजूद रहे उपराष्ट्रपति

‘चलो जीते हैं’ 32 मिनट की शॉर्ट फिल्म है। बुधवार को इस फिल्म की स्पेशल स्क्रीनिंग रखी गई। राज्यसभा में फिल्म की स्क्रीनिंग के दौरान उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, रविशंकर प्रसाद, राज्यवर्धन सिंह राठौर और जेपी नड्डा मौजूद थे। हालांकि इस फिल्म को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक नहीं कह सकते, क्योंकि ये उनके बचपन के जीवन पर आधारित जरूर है, लेकिन ये फिल्म पीएम मोदी की बायोपिक नहीं है।

Chalo Jite hain

सत्य घटना पर आधारित है फिल्म
29 जुलाई को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने वाली ये शार्ट फिल्म सत्य घटना से प्रेरित है। यह एक बच्चे की कहानी है, जो देश के लिए कुछ करना चाहता है। बच्चे का नाम नरु है। फिल्म की कहानी की बात करें तो स्वामी विवेकानंद की किताब पढ़ने के दौरान नरु उनके विचार, ‘वही जीते हैं जो दूसरों के लिए जीते हैं’ से बहुत प्रभावित होता है। वह दूसरों के लिए क्या कर सकता है, यह सवाल उसे मथता है। वह दूसरों से भी इसके जवाब मांगता है। सूत्रों के मुताबिक, यह शॉर्ट फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बचपन से प्रेरित है। यह कहानी ‘सामाजिक समरता’ किताब से ली गई है। यह किताब नरेंद्र मोदी के विचारशील लेखों का संकलन है।

मंगेश हदावले के निर्देशन में बनी है फिल्म
इस फिल्म का निर्देशन मंगेश हदावाले ने किया है। आपको बता दें कि मंगेश की डेब्यू मराठी फिल्म ‘टिंगिया’ को राष्ट्रीय समेत कई अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार मिले थे। भूषण कुमार और महावीर जैन द्वारा निर्मित यह शॉर्ट फिल्म जिंदगी के मकसद को तलाशती है। साथ ही भलाई की ताकत को चित्रित करने का प्रयास है। इस फिल्म का भाजपा की तरफ से जोरदार प्रमोशन भी किया जा रहा है।

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